मंत्रालय द्वारा बताया गया कि इसके साथ ही भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक बन गया है।
जनवरी 2025 के पहले पखवाड़े में भारत ने इटली, बेल्जियम और रूस सहित अन्य देशों को 9,300 टन से अधिक कॉफी का निर्यात किया। अपने अनोखे और बेहतर स्वाद के कारण देश के कॉफी निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है।
भारत के कॉफी उत्पादन में लगभग तीन-चौथाई की हिस्सेदारी अरेबिका और रोबस्टा बीन्स की है। इन्हें मुख्य रूप से बिना भुने बीन्स के रूप में निर्यात किया जाता है। हालांकि, भुनी हुई और इंस्टेंट कॉफी जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे निर्यात में तेजी आ रही है।
मंत्रालय ने बताया कि कैफे कल्चरल के बढ़ने, अधिक खर्च योग्य आय और चाय की तुलना में कॉफी के प्रति बढ़ती प्राथमिकता के कारण भारत में कॉफी की खपत भी लगातार बढ़ रही है और यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बढ़ रहा है।
घरेलू खपत 2012 में 84,000 टन से बढ़कर 2023 में 91,000 टन हो गई है और यह वृद्धि कॉफी के बढ़ते चलन को दिखाती है।
भारत की कॉफी मुख्य रूप से पारिस्थितिक रूप से समृद्ध पश्चिमी और पूर्वी घाटों में उगाई जाती है, जो अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र हैं। कर्नाटक उत्पादन में सबसे आगे है, जिसने 2022-23 में 248,020 मीट्रिक टन कॉफी का उत्पादन किया। उसके बाद केरल और तमिलनाडु का स्थान है।
कॉफी का उत्पादन भारत में सदियों पहले शुरू हुआ था, जब प्रसिद्ध संत बाबा बुदन 1600 के दशक में कर्नाटक की पहाड़ियों पर सात मोचा बीज लेकर आए थे। बाबा बुदन गिरि ने अपने आश्रम के प्रांगण में इन बीजों को लगाने के उनके सरल कार्य ने अनजाने में ही भारत को दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादकों में से एक के रूप में स्थापित कर दिया।
अब भारत में कॉफी की खेती एक साधारण प्रथा से विकसित होकर एक संपन्न उद्योग में बदल गई है और भारत की कॉफी को अब दुनिया भर में पसंद किया जा रहा है।